Anupama | 11th Sept written update | Rahi Anuj will rename the cafe to Prem Pake,

Sep 11, 2026 - 21:51
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Anupama | 11th Sept written update | Rahi Anuj will rename the cafe to Prem Pake,

Anupama | 11th Sept written update | Rahi Anuj will rename the cafe to Prem Pake,

  तो दोस्तों स्टार प्लस पर आने वाली ड्रामा से भरपूर टीवी सीरियल अनुपमा । के आज के एपिसोड में काफी ट्विस्ट एंड अपडेट आने वाले हैं तो एपिसोड की शुरुआत में आपको देखने मिलेगा वहां पर शाह हाउस में जन्माष्टमी को लेकर सभी लोग तैयारियां कर रहे होते हैं। तभी जया कहती हैं कि कान्हा जी को किस फ्लेवर का केक पसंद है? यह सुनकर सभी लोग हंसने लगते हैं और कहते हैं कि कान्हा जी को केक नहीं, बल्कि माखन पसंद है और उस वक्त केक भी नहीं हुआ करता था।

जया कहती हैं, “तब तो कार्ड का भी फैशन नहीं था, लेकिन मैंने उनके लिए कार्ड तो बनाया है। तो अब हमें केक भी बनाना चाहिए।” अनुपमा कहती हैं, “यह छोकरी ने तो बहुत अच्छा जवाब दिया है।” यह सुनकर सभी लोग जया की इस बात से सहमत हो जाते हैं।

तो दूसरी ओर कोठारी निवास में भी सभी लोग बैठे होते हैं। तभी अनिल एक लिफाफा लेकर आता है और कहता है, “राही, यह तुम्हारे लिए है।” प्रेम उस लिफाफे को किसने और क्यों भेजा है, इसके बारे में पूछता है। राही कहती है, “तुम खुद ही देख लो।” लेकिन प्रेम के हाथ खराब होते हैं, इसलिए अनिल वह लिफाफा खोलकर देखता है। वह कहता है, “यह तो एडवोकेट के वहां से आया है।”

अनिल लिफाफा पढ़कर सभी को बताता है कि राही अनुज कैफे को प्रेम के नाम करने जा रही है। यह सुनकर सभी लोग हैरान रह जाते हैं। प्रेम राही से इसकी वजह पूछता है और कहता है, “तुम ऐसा क्यों कर रही हो?”

राही उसे कुछ नहीं बताती और कहती है, “बस ऐसे ही। यह सब काम करके मैं थक चुकी हूं। मैंने सोचा कि वह कैफे तुम्हारे नाम कर दूं, तो थोड़ी टेंशन फ्री हो जाऊंगी।” लेकिन प्रेम उनकी बात नहीं मानता और कहता है, “कोई और बात है, जो तुम मुझसे नहीं बता रही हो।”

और वहां शाह हाउस में भी सभी लोग बैठे होते हैं। तभी पारितोष वहां आता है और अनुपमा को थैंक यू कहता है, क्योंकि उन्होंने उसे जेल नहीं भेजा। यह सुनकर अनुपमा उसे जोर-जोर से डांटने लगती हैं। बाद में वह सभी से माफी मांगती हैं और कहती हैं, “मेरी वजह से आज के खुशी के दिन पर आप सभी को यह सब सुनना पड़ा।” तब हसमुख कहेता हैं, “नहीं बेटा, तुम हमसे माफी मत मांगो। तुम्हें जो कहना है, वह दिल खोलकर कह दो।”

इसके बाद सभी लोग आपस में बातें कर ही रहे होते हैं कि तभी वहां एक व्यक्ति लिफाफा लेकर आता है। पारितोष वह लिफाफा लेकर लीला को दे देता है। लीला हसमुख के पास जाती हैं और कहती हैं, “आज खुशी का दिन है। मैं कोई तमाशा नहीं करना चाहती। आपने कहा कि जो भी कहना हो, वह दिल खोलकर कह दीजिए। तो यह लीजिए।” ऐसा कहते हुए लीला हसमुख को वह लिफाफा दे देती हैं और कहती हैं, “इन पर साइन कर दीजिए।”

यह देखकर सभी लोग लिफाफे के बारे में पूछते हैं कि यह किस चीज के लिए है। तब लीला बताती हैं कि यह शाह हाउस के दस्तावेज हैं और हसमुख से उन पर साइन करने के लिए कहती हैं। हसमुख लीला को समझाते हुए कहते हैं, “यह घर हम दोनों का है।” लीला कहती हैं, “ हम दोनों का था । तो आपने इसे गिरवी रखने से पहले मुझसे पूछना भी जरूरी क्यों नहीं समझा?” इसके बाद दोनों के बीच बहस होने लगती है।

यह देखकर अनुपमा उन दोनों के सामने हाथ जोड़ती हैं और कहती हैं, “आप दोनों मेरी वजह से आपस में झगड़ा मत कीजिए।” फिर अनुपमा लीला से कहती हैं, “मैं आपको स्टांप पेपर पर लिखकर दे सकती हूं कि मुझे आपकी जायदाद में से कुछ भी नहीं चाहिए। वह भी नहीं, जो मुझे आप दोनों की ओर से गिफ्ट में मिला है।”

इसके बाद अनुपमा लीला से कहती हैं, “बापूजी, इन पर साइन कर देंगे, लेकिन उनकी भी एक शर्त होगी।” अनुपमा लीला की ओर देखते हुए कहती हैं, “यह मकान सिर्फ आपके ही नाम रहेगा। आप इसे किसी और के नाम नहीं कर पाएंगी और खासकर पारितोष और पाखी के नाम पर तो बिल्कुल नहीं।” यह सुनकर पारितोष और पाखी दोनों हैरान रह जाते हैं।

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